साहिल की माँ बोलीं: ‘अगर उनका बेटा होता तो क्या छोड़ देते…’
एक छोटा-सा कमरा है. उसी कमरे में बैठी हैं एक महिला, जिन्होंने ठीक सत्रह दिन पहले अपनी इकलौती संतान को खोया है.
जिस कमरे में वह बैठी हैं, वह कमरा उनके बेटे साहिल धनेसरा का था. कमरे की दीवारों पर आज भी उसके सपनों और उम्मीदों की निशानियां साफ़ नज़र आती हैं. एक ओर मेडल्स के गुच्छे टंगे हैं, तो दूसरी ओर लिखा… ‘एक मिलियन डॉलर कमाने’ का उसका खुद से किया गया वादा. लेकिन अब ये सारे वादे और सपने अधूरे रह गए हैं.23 साल से मेरी दुनिया वही था. उसको इतना संभालकर रखा. जब भी घर से बाहर निकलता था, डर लगता था और मेरा डर आख़िर जीत गया”, ये शब्द साहिल की मां इन्ना माकन के हैं.साहिल की मौत और बेबसी में न्याय की गुहार लगाती उनकी मां की आवाज़ इन दिनों भारतीय टेलीविजन चैनलों की सुर्खियां बन चुकी है. वह मीडिया से एक ही बात बार-बार दोहराते थक चुकी हैं, लेकिन उनकी आंखों का दर्द जस का तस है.वह कहती हैं, ”पुलिस स्टेशन से कॉल आई थी मैडम…एक बजकर 19 मिनट में. उन्होंने बोला एसएचओ बोल रहा हूं मैं. उसके बाद तो कॉल के बाद मुझे कोई होश ही नहीं है…कौन था…क्या था, मैंने तो ये भी नहीं देखा वहां कितने पुलिसवाले थे, मैंने कुछ नहीं देखा. मैं तो अपने बच्चे की डेड बॉडी जो वहां पड़ी थी जिस हालत में…उसे देखकर बिल्कुल सदमे में चली गई.”साहिल 23 साल के थे. अपनी बीबीए की डिग्री पूरी कर अगले कुछ महीने में बस ब्रिटेन जाने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन इसी बीच बीते तीन फ़रवरी को हुए एक सड़क हादसे ने उनकी जान ले ली और उनकी मां से उनके जीने का इकलौता सहारा छीन लिया.
साहिल की मां उसकी परवरिश अकेले ही कर रही थीं.



